केरल हाईकोर्ट का अहम फैसला: नाबालिग पत्नी से संबंध पर लागू होगा POCSO, मुस्लिम पर्सनल लॉ नहीं
केरल हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि नाबालिग पत्नी के साथ यौन संबंध के मामलों में मुस्लिम पर्सनल लॉ का प्रावधान नहीं, बल्कि प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस (POCSO) अधिनियम लागू होगा।
मुख्य बातें:
- पीठ ने कहा कि नाबालिग पत्नी के साथ शारीरिक संबंध बनाना POCSO के तहत अपराध होगा।
- मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत शादी की उम्र के मुद्दे पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह कानून की नजर में मान्य नहीं है।
- यह फैसला उन मामलों में लागू होगा जहां पत्नी की उम्र 18 वर्ष से कम है।
अदालत ने यह भी कहा कि कानून की नजर में बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इसके लिए बनाए गए विशेष कानून का पालन करना आवश्यक है।
न्यायालय का निर्देश: न्यायालय ने स्पष्ट किया कि किसी भी धार्मिक या व्यक्तिगत कानून को बच्चों की सुरक्षा के लिए बने कानूनों से ऊपर नहीं रखा जा सकता।
इस फैसले के बाद, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि नाबालिगों के अधिकारों की सुरक्षा हो और उनके खिलाफ होने वाले किसी भी प्रकार के शोषण पर कानूनी कार्रवाई की जा सके।
इस निर्णय ने सामाजिक और कानूनी स्तर पर महत्वपूर्ण संदेश दिया है, जो नाबालिगों के अधिकारों और सुरक्षा को प्राथमिकता देता है।
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